सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होगा हलफनामा, पुराने फैसले को चुनौती

दिल्ली। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) ने घोषणा की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर मंदिर में प्रजनन आयु की महिलाओं के प्रवेश से जुड़ी मौजूदा परंपराओं की रक्षा का पक्ष रखेगा।

टीडीबी अध्यक्ष के. जयकुमार ने बताया कि बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि वर्तमान परंपरा को जारी रखने की मांग अदालत के समक्ष रखी जाएगी। बोर्ड 14 मार्च से पहले अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगा। उन्होंने दोहराया कि बोर्ड 2018 के उस फैसले का समर्थन नहीं करता, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर लगी रोक हटाने की अनुमति दी थी।

हालांकि, 2018 के फैसले की समीक्षा या उसमें बदलाव करना पूरी तरह अदालत के अधिकार क्षेत्र में है। मामले की सुनवाई के दौरान धार्मिक परंपरा, समानता के अधिकार और आस्था के बीच संतुलन को लेकर व्यापक बहस हो चुकी है। अब बोर्ड का हलफनामा इस बहस को फिर से केंद्र में ला सकता है।

इसी बीच, कोल्लम की सतर्कता अदालत ने सबरीमाला से जुड़े कथित सोना चोरी मामले में टीडीबी के एक पूर्व सदस्य की जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर द्वारपालक प्रतिमाओं और श्रीकोविल के द्वार-फ्रेम से कथित स्वर्ण हानि के दो मामलों में आरोप हैं। आरोपी ने चिकित्सा आधार पर जमानत की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

सबरीमाला विवाद धार्मिक परंपरा और संवैधानिक अधिकारों के टकराव का प्रतीक बन चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाले नए हलफनामे से इस बहुचर्चित मामले में एक नया कानूनी मोड़ आ सकता है।

Exit mobile version