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सोमनाथ पर पहले आक्रमण के हजार साल: पीएम मोदी बोले – यह विध्वंस नहीं, भारत मां की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक भावनात्मक लेख लिखा है। उन्होंने इस अवसर को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ नाम दिया और कहा कि सोमनाथ की कहानी केवल एक मंदिर के टूटने-बनने की नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और अदम्य स्वाभिमान की गाथा है।

पीएम ने अपने लेख में बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख मिलता है – “सौराष्ट्रे सोमनाथं च…।” शास्त्रों के अनुसार सोमनाथ के दर्शन मात्र से मनुष्य पापों से मुक्त होकर मोक्ष का मार्ग पाता है। यही कारण है कि यह मंदिर सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।

प्रधानमंत्री ने लिखा कि जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस पवित्र धाम पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त किया। इसका उद्देश्य केवल पत्थरों का विध्वंस नहीं, बल्कि भारत की आस्था और सभ्यता पर प्रहार करना था। फिर भी हजार साल बाद आज सोमनाथ पूरे वैभव के साथ खड़ा है और दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, लेकिन आस्था अमर रहती है।

उन्होंने बताया कि सोमनाथ का वर्तमान स्वरूप 11 मई 1951 को अस्तित्व में आया। संयोग से वर्ष 2026 इस पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जबकि के.एम. मुंशी ने इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति को याद करते हुए पीएम ने लिखा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस कार्यक्रम को लेकर सहमत नहीं थे, लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे।

पीएम मोदी ने देवी अहिल्याबाई होलकर और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के योगदान को भी स्मरण किया और अंत में कहा कि यदि सोमनाथ हजार वर्षों के आघात सहकर फिर खड़ा हो सकता है, तो भारत भी अपनी प्राचीन समृद्धि को पुनः प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने लेख का समापन करते हुए लिखा – “आइए, इसी प्रेरणा के साथ एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ें। जय सोमनाथ।”

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