भटके कदमों को नई दिशा: सुकमा में पुनर्वास से विकास की नई कहानी
रायपुर/सुकमा। नक्सल प्रभावित सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां चल रही गतिविधियों का जायजा लिया और पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और रोजगार के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों के चेहरे पर दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।
सरकार की नक्सल पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है, जिनमें 361 लोग आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ चुके हैं। वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपए का स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है।
पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही 107 हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल रूप से सशक्त बन सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों को मोबाइल, आवास की चाबियां, राजमिस्त्री किट और नियुक्ति पत्र वितरित किए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 लोगों को आवास की चाबी सौंपी गई। नक्सल प्रभावित परिवारों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 और अन्य विभागों में 95 लोगों को रोजगार दिया गया।
इस अवसर पर ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद महेश कश्यप सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
