कमांडर-डिप्टी कमांडर रैंक के कैडर भी शामिल; 36 हथियार, 1007 कारतूस और 800 ग्राम सोना बरामद
तेलंगाना। छत्तीसगढ़ से लगे तेलंगाना में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राजधानी हैदराबाद में पीएलजीए बटालियन के कमांडर सोढ़ी केसा समेत कुल 42 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है। सरेंडर करने वालों में कई वरिष्ठ रैंक के माओवादी शामिल हैं, जो लंबे समय से सक्रिय थे।
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के 21 सदस्य, दंडकारण्य स्पेशल जोन कमेटी (DKSZC) के 10 और तेलंगाना स्टेट कमेटी (TSC) के 11 कैडर शामिल हैं। इनमें कमांडर और डिप्टी कमांडर स्तर के माओवादी भी शामिल हैं, जो कई बड़ी वारदातों में संलिप्त रहे हैं।
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा किया। इनमें 36 आधुनिक हथियार शामिल हैं, जिनमें AK-47, SLR, INSAS राइफल, 303 राइफल, पिस्टल और रिवॉल्वर शामिल हैं। इसके अलावा 1007 जिंदा कारतूस और करीब 800 ग्राम सोना भी बरामद किया गया है।
आत्मसमर्पण करने वालों में कुख्यात नक्सली सोढ़ी मल्ला उर्फ केशल उर्फ निर्मल और मडकम भीमा उर्फ गंजेड उर्फ मुन्ना जैसे नाम शामिल हैं। सोढ़ी केसा पीएलजीए बटालियन नंबर-1 का प्रमुख चेहरा रहा है और करीब 30 वर्षों से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था। वह मूल रूप से सुकमा जिले का रहने वाला है और बस्तर क्षेत्र में युवाओं को संगठन से जोड़ने में उसकी बड़ी भूमिका रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता है। लगातार दबाव, ऑपरेशन और पुनर्वास नीतियों के चलते नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा और उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। इस कार्रवाई को बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
