छत्तीसगढ़ में बल्क परचेस से 226 आवास बिके, 42.17 करोड़ रुपए का कारोबार

नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय खरीदेगा 128 फ्लैट; खाली मकानों के उपयोग और नई बसाहट बढ़ाने पर जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से खाली पड़े सरकारी आवासों की बिक्री को गति मिलने लगी है। राज्य सरकार की बल्क परचेस नीति के तहत दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़, नवा रायपुर और आरंग में अब तक 226 आवासों की बिक्री हुई है।

इनका कुल मूल्य करीब 42.17 करोड़ रुपए है। इसके अलावा नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय ने 128 फ्लैट खरीदने का निर्णय लिया है। इनकी अनुमानित कीमत 16.20 करोड़ रुपए है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं आवास-पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह पहल की गई है। इसका उद्देश्य खाली आवासों का उपयोग बढ़ाने, सरकारी राजस्व में वृद्धि करने और आवासीय परिसरों में बसाहट को प्रोत्साहित करना है।

जीएसटी विभाग ने खरीदे 68 मकान

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के मुताबिक, जीएसटी विभाग ने चार शहरों में 68 आवास खरीदे हैं। इनमें दुर्ग के 24 मकान 6.50 करोड़, जगदलपुर के 16 मकान 6 करोड़, बिलासपुर के 25 मकान 10.35 करोड़ और रायगढ़ के 3 मकान 92 लाख रुपए में खरीदे गए हैं।

वहीं, नवा रायपुर में मेफेयर संस्था ने 128 मकान 16.20 करोड़ रुपए और मैट्स विश्वविद्यालय ने आरंग में 30 मकान 2.20 करोड़ रुपए में खरीदे हैं।

तीन बार विज्ञापन के बाद भी खाली मकानों की बिक्री

नवा रायपुर के सेक्टर-16, 30 और 34 में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत EWS और LIG वर्ग के लिए 6,296 आवास बनाए गए थे। इनमें कुछ मकान बार-बार विज्ञापन जारी होने के बावजूद नहीं बिक पाए थे।

ऐसे आवासों की बिक्री का रास्ता खोलने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद ने 14 नवंबर 2025 को निर्णय लिया था। इसके तहत तीन बार विज्ञापन के बाद भी नहीं बिकने वाले आवास पात्र हितग्राहियों के अलावा अन्य आय वर्ग के लोगों और संस्थाओं को भी बेचे जा सकते हैं।

EWS-LIG को अनुदान मिलता रहेगा

मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव के मुताबिक, आवासीय योजनाओं की सफलता भवन बनाने के साथ उनमें बसाहट होने से तय होती है। संस्थागत खरीदी से कर्मचारियों को आवास मिलेगा और आसपास की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने बताया कि आवासों की बिक्री निर्धारित नियमों के तहत ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से की जा रही है। इसमें पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए जा रहे हैं। EWS और LIG के पात्र हितग्राहियों को पहले की तरह सरकारी अनुदान मिलता रहेगा, जबकि अन्य आय वर्ग और संस्थाओं को बिना अनुदान के आवास खरीदने की सुविधा होगी।

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