नई दिल्ली। दुनिया के अमीर लोगों का अपने देश से दूसरे देशों की ओर पलायन तेजी से बढ़ रहा है। हेनली प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, इस साल रिकॉर्ड करीब 1.65 लाख करोड़पति अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की योजना बना रहे हैं। यह संख्या पिछले साल के 1.42 लाख से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में करीब 1.34 लाख करोड़पतियों ने माइग्रेशन किया था, जबकि 2013 में यह आंकड़ा केवल 51 हजार था।
अब अमीर परिवार सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ही देश नहीं बदल रहे, बल्कि बेहतर जीवन स्तर, सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता, निवेश के अवसर और बच्चों की शिक्षा जैसे कारण भी उनकी प्राथमिकता में शामिल हैं। रिपोर्ट में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को दुनिया का सबसे पसंदीदा वेल्थ हब बताया गया है। UAE का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 85.3 है, जबकि भारत का स्कोर 56.5 दर्ज किया गया है।
अमेरिका से सबसे ज्यादा अमीरों का पलायन
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से सबसे ज्यादा करोड़पति दूसरे देशों की नागरिकता या स्थायी निवास के लिए आवेदन कर रहे हैं। अमेरिका का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 62.3 है। 2025 में वहां से दूसरे देशों में जाने के आवेदन दोगुने हुए और 2026 में भी यह रफ्तार जारी रहने की संभावना है।
अमेरिका से बाहर जाने वाले ज्यादातर अमीर यूरोप और लैटिन अमेरिका-कैरिबियन देशों को पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब आधे आवेदन यूरोपीय देशों के लिए हैं, जबकि एक चौथाई से ज्यादा लोग लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं।
ब्रिटेन भी बना बड़ा सोर्स मार्केट
ब्रिटेन में भी अमीरों के पलायन की रफ्तार बढ़ी है। 2024-25 के दौरान ब्रिटेन से जुड़े आवेदनों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कभी 20वें स्थान पर रहने वाला ब्रिटेन अब दुनिया के टॉप-5 सोर्स मार्केट में शामिल हो गया है।
भारत में दूसरी नागरिकता का बढ़ता चलन
भारत का वेल्थ मोबिलिटी स्कोर 56.5 है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अमीर परिवार अब दूसरी नागरिकता या विदेश में स्थायी निवास को अपनी एस्टेट प्लानिंग का हिस्सा मान रहे हैं।
इसके पीछे शिक्षा, बिजनेस विस्तार, परिवार के भविष्य की सुरक्षा और टैक्स स्ट्रक्चरिंग जैसे कारण प्रमुख हैं। हालांकि, भारत में पूंजी नियंत्रण और टैक्स नियमों की जटिलता को बड़ी चुनौती बताया गया है।
UAE और यूरोप बने पसंदीदा ठिकाने
UAE को अमीरों के लिए सबसे आकर्षक विकल्प माना जा रहा है। कई कारोबारी इसे नए निवेश और वैश्विक विस्तार के लिए प्लेटफॉर्म की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं यूरोप में स्पेन और पुर्तगाल के निवेश कार्यक्रमों में बदलाव के बाद ग्रीस को फायदा मिल रहा है। निवेश आधारित नागरिकता और निवास योजनाओं में पुर्तगाल, इटली, नीदरलैंड्स, साइप्रस और ग्रीस जैसे देशों की मांग बनी हुई है।
रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के अमीरों का यह पलायन आने वाले वर्षों में वैश्विक निवेश और आर्थिक शक्ति के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
