इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 15वीं मौत हुई है। 68 वर्षीय गीताबाई इसी मामले की नवीनतम शिकार बनीं। 16 बच्चों समेत कुल 201 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी मौतें दूषित पानी पीने के कारण हुईं। CMHO डॉ. माधव हसानी ने कहा कि सैंपल की जांच में यह साफ हुआ है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि डिटेल्ड रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट जारी है।
भागीरथपुरा में चौकी के पास बने शौचालय के नीचे से गुजरती पाइपलाइन में लीकेज मिला है, जिससे सीवेज पानी में मिला और पेयजल लाइन में जा पहुंचा। इससे हैजा, शिगेला, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे घातक बैक्टीरिया फैलने की आशंका है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे गंभीर माना और कहा कि लीकेज वाली जगह सबसे प्रमुख कारण हो सकती है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई आज दोपहर 12 बजे जबलपुर की दो सदस्यीय बेंच द्वारा ऑनलाइन की जाएगी।
स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों ने मंत्री विजयवर्गीय से नाराजगी जताई। उन्होंने सहायता राशि का चेक लेने से मना कर दिया और आरोप लगाया कि पिछले दो साल से पानी गंदा आ रहा है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सांसद शंकर लालवानी ने इलाके में 10 नई बोरिंग कराने की घोषणा की है।
CMHO ने बताया कि कुल 201 मरीज अस्पतालों में हैं, जिनमें से 32 ICU में हैं। प्रशासन ने 1714 घरों का सर्वे किया और 8571 लोगों की जांच की। अपर मुख्य सचिव ACS संजय दुबे ने स्थल का निरीक्षण कर रैंडम सैंपलिंग के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया कि पेयजल सप्लाई में कहीं और दूषित पानी न पहुंचे और दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
