रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास और शांति की एक नई इबारत लिखी जा रही है।
18 मार्च 2026 को राज्य विधानसभा परिसर में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब बीजापुर और कांकेर जिलों के 140 आत्मसमर्पित नक्सलियों (जिनमें 54 महिलाएं और 86 पुरुष शामिल हैं) ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की। यह मिलन बस्तर में बदलते हालातों और शासन के प्रति बढ़ते भरोसे का जीवंत प्रमाण है।
भय के साये से सम्मानजनक जीवन तक
संवाद के दौरान पूर्व नक्सलियों ने अपने अतीत के काले अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे पहले का जीवन जंगलों में असुरक्षा, भूख और निरंतर भय के बीच बीतता था।
मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्होंने पहली बार अपने परिवार के साथ होली का त्योहार मनाया, जो उनके लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था।
बदलती बस्तर की तस्वीर
आत्मसमर्पित सदस्यों ने स्वीकार किया कि उनके क्षेत्रों में अब बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंचने से ग्रामीणों का जीवन सुगम हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान पर विश्वास जताना ही उनके जीवन का सबसे सही निर्णय रहा है।
पुनर्वास और सुशासन का संकल्प
मुख्यमंत्री साय ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने आश्वस्त किया कि:
- राज्य सरकार उनके पुनर्वास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
- केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह) के नक्सलवाद उन्मूलन के संकल्प को शीघ्र पूरा किया जाएगा।
- ‘सुशासन’ के माध्यम से विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाएगा।
इस अवसर पर गृहमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप भी उपस्थित थे। यह मुलाकात संदेश देती है कि गोली की जगह बोली और विकास ने अब बस्तर के मन को जीतना शुरू कर दिया है।
