रायपुर। प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री पर लगाया गया 1 प्रतिशत टैक्स जल्द खत्म किया जाएगा। परिवहन विभाग पिछले करीब चार महीनों से ट्रक, कार और दोपहिया सहित सभी पुराने वाहनों के नामांतरण पर यह टैक्स वसूल रहा है, जिससे वाहन खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत वाहन चाहे 10-15 साल पुराना ही क्यों न हो, उस पर टैक्स उसकी मूल शोरूम कीमत के आधार पर लिया जा रहा है। इससे 5 से 10 लाख रुपए कीमत की पुरानी कारों पर 5 हजार से 10 हजार रुपए तक अतिरिक्त राशि देनी पड़ रही है। टैक्स जमा किए बिना वाहन मालिक का नाम ट्रांसफर भी नहीं हो पा रहा है।
नामांतरण की सामान्य सरकारी फीस करीब 2200-2300 रुपए है, जबकि फार्म और अन्य शुल्क जोड़कर यह खर्च लगभग 3 हजार रुपए तक आता है। लेकिन 1 प्रतिशत टैक्स लागू होने के बाद यही खर्च बढ़कर 6 से 10 हजार रुपए अतिरिक्त हो जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग के उन लोगों पर पड़ा है जो पुरानी गाड़ियां खरीदते हैं।
राज्य में हर साल औसतन डेढ़ लाख से ज्यादा पुराने वाहनों की बिक्री होती है। इनमें आधे से ज्यादा दोपहिया, लगभग 25 प्रतिशत कारें और बाकी मालवाहक व भारी वाहन शामिल हैं। ऐसे में यह टैक्स बड़ी संख्या में खरीदारों को प्रभावित कर रहा है।
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने माना है कि शोरूम कीमत के आधार पर टैक्स वसूली का निर्णय व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गलत फैसला है और इसे जल्द वापस लिया जाएगा, ताकि वाहन खरीदारों को राहत मिल सके।
